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दिल्लगी वो मेरी पहचान गए

कभी दिल से गए तो कभी हम जान से गए छूटकर कितने तीर नज़रों की कमान से गए तुझे पाने की चाहत में कितना वक्त ज़ाया किया और गुज़र कर हम कितने ही तूफ़ान से गए होती ग़र तमन्ना दिल में त...