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दिल्लगी वो मेरी पहचान गए

कभी दिल से गए तो कभी हम जान से गए छूटकर कितने तीर नज़रों की कमान से गए तुझे पाने की चाहत में कितना वक्त ज़ाया किया और गुज़र कर हम कितने ही तूफ़ान से गए होती ग़र तमन्ना दिल में त...

दिल से चाहने वालों को दिल से दूर मत करना

मेरा दिल बेवफाई से तू चकनाचूर मत करना दिल से चाहने वालों को दिल से दूर मत करना मोहब्बत से तेरी जानेजाँ अब मै शाद रहता हूँ जमाने भर में चाहत को मेरी मश़हूर मत करना मेरे दिल में...

ग़म-ए-फुरकत

लौट आओ " चाँदनी.. " अभी रात बाकी है... ता-उम्र जो कटना है वो साथ बाकी है - यूं छोड़कर तनहा क्यूं मुझसे दूर रह रही हो जिंदगी के हसीन दिन और रात बाकी है - मोहब्बत को तुमने सिर्फ अल्फाजों ...

याद

वो नज़रों के तीर और कातिल अदाएं बेवफाई भी वो करते हैं करके वफाएं जुनून इश्क का यूं तो खतम न हो सका देता था वो अक्सर छोड़ जाने की सज़ाएं महसूस किया उसको वो जब भी पास थी महक उसकी ...

दीवाना इश्क

राह-ए-इश्क मे कोई मस्ताना हो गया चले जिस राह सफ़र वो सुहाना हो गया तेरा हुस्न किसी शराब से कम नहीं.. देख तुझको बहका सारा ज़माना हो गया महफ़िल को अपनी अदाओं से है लूटा .. तेरे जलवो...

बेफिक्र मोहब्बत

जब कोई फिक्र नहीं मेरी तो प्यार क्यों किया आँखों से आँखों को तुमने चार क्यों किया रह लेते हम भी तनहा तेरे बगैर बेवफा बेवजह तूने दिल मेरा बेकरार क्यों किया इंसानियत नहीं ते...

इश्क मे पड़ने की ज़रूरत क्या है

दिल से तेरे मैं खुद ही निकल जाता हूँ तुझे बताने की ज़रुरत क्या है मेरे इश्क से कर ली बेरुखी तूने ये जताने की ज़रुरत क्या है.... ~~ हिम्मत नहीं है की अब मैं फिर साज़िश-ए-इश्क में पड़ जाऊ...