दिल से चाहने वालों को दिल से दूर मत करना
मेरा दिल बेवफाई से तू चकनाचूर मत करना
दिल से चाहने वालों को दिल से दूर मत करना
मोहब्बत से तेरी जानेजाँ अब मै शाद रहता हूँ
जमाने भर में चाहत को मेरी मश़हूर मत करना
मेरे दिल में है जो भी बात तुझसे कह रहा हूँ मैं
लगाकर घाव सीने में इन्हें नासूर मत करना
ज़फाएं कर रहे हो तुम वफादारों की महफिल में
तू गिर जाएगा नज़रों में मुझे मजबूर मत करना
वफा से ही तो जिंदा है मोहब्बत ऐ मेरे यारों
नया तुम इश्क में पैदा कोई दस्तूर मत करना
~ अनुज सीतापुरी
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