बेफिक्र मोहब्बत
जब कोई फिक्र नहीं मेरी
तो प्यार क्यों किया
आँखों से आँखों को
तुमने चार क्यों किया
रह लेते हम भी तनहा
तेरे बगैर बेवफा
बेवजह तूने दिल मेरा
बेकरार क्यों किया
इंसानियत नहीं तेरे दिल में
मैं ये देख सकता हूं
वादा वफा का तूने
हर बार क्यों किया
अब किसी के प्यार का
मुरीद नहीं होता "अनुज"
कीमती अपना वक्त तुझपर
न जाने बेकार क्यों किया
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