ग़म-ए-फुरकत

लौट आओ " चाँदनी.. "
अभी रात बाकी है...
ता-उम्र जो कटना है
वो साथ बाकी है
-
यूं छोड़कर तनहा क्यूं
मुझसे दूर रह रही हो
जिंदगी के हसीन
दिन और रात बाकी है
-
मोहब्बत को तुमने सिर्फ
अल्फाजों मे ही तोला है
दिल से दिल की होनी
अभी मुलाकात बाकी है
-
ग़म ही मिला है
हर जगह मुझको
तुमसे मुझे शायद
मिलना प्यार बाकी है
~~
- अनुज राठौर

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